Wednesday, 13 January 2010

चर्चित एंकरों को क्यों नहीं मिलती टीआरपी?


टेलीविजन अखाड़ों में इन दिनों टीआरपी को लेकर बहस जारी है। टेलीविजन और मीडिया के दिग्गज इस अखाड़े में विचारों की अपनी-अपनी पेंच भिड़ाने में जुटे हैं। सबों के पास कुछ न कुछ कहने को है और सबों ने इसके लिए अपनी-अपनी सुविधा के लिए मंचों का चुनाव कर लिया है। आइबीएन7 के आशुतोष ने जहां दैनिक हिन्दुस्तान में अपनी बात कही,रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग पर ही इस मामले को उठाया तो वहीं न्यूज24 के मैनेजिंग एडीटर अजीत अंजुम ने फेसबुक पर ही टेलीविजन का अखाड़ा खोल दिया और लगातार अपनी बात कह रहे हैं। दिलीप मंडल ने टीआरपी की बात मीडियाखबर डॉट कॉम पर रखी है। यहां तक कि खुद एक टीवी चैनल ने इसके विरोध में मोर्चा खोलते हुए आधे घंटे का कार्यक्रम प्रसारित किया। कुल मिलाकर कहानी ये है कि प्रिंट,टेलीविजन,इन्टरनेट और उसी नयी विधाओं में टीआरपी का मामला गर्म है। जनतंत्र ने भी इस पूरी बहस को उठाने की कोशिश की है। टी प्लस की कोशिश है कि टीआरपी की पूरी बहस को गंभीरता से ले औऱ सारी बातों को आप तक पहुंचाने का काम करे। आपसे अपील है कि आप अपनी बेबाक राय जाहिर करें जिससे कि कुछ नतीजे निकलकर सामने आ सकें। ये अलग बात है कि इन सबके वाबजूद दिलीप मंडल,अजय ब्रह्मात्मज सहित दूसरे कई बरिष्ठ मीडियाकर्मियों का मानना है कि टीआरपी पर बात करने के लिए एडीटर सहित हमलोग अनक्वालिफाइड लोग हैं। ऐसा इसलिए भी कि टीआरपी बाजार,बिजनेस और विज्ञापन का हिस्सा है जो कि सिर्फ भाषिक बहसबाजी से नहीं बदलनेवाला। मेरी अपनी समझ है कि जब आप टीआरपी की बात कर रहे हैं तो कंटेंट पर भी बात करें क्योंकि एक आम ऑडिएंस को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि टेलीविजन का रेवन्यू मॉल क्या है? उसे इस बात से मतलब है कि उसका टेलीविजन कंटेंट के स्तर पर दुरुस्त हो रहा है कि नहीं? बहरहाल यहां हम फेसबुक पर इसी से जुड़ी एक बहस को आपके सामने पेश कर रहे हैं जिसे कि अजीत अंजुम ने उठाया है कि आखिर चर्चित एंकरों को टीआरपी क्यों नहीं मिलती? इस बहस में जो लोग शामिल यहां उन्हें हायपर लिंक नहीं कर रहा,बहुत टाइम टेकिंग का काम है। आप व्यक्तिगत तौर पर उन्के बारे में जानना चाहें तो इस लिंक पर चटकाकर जान सकते हैं:-

तस्वीर- साभार- मीडिया मंत्र

Ajit Anjum

टीवी चैनल्स के जिन कार्यक्रमों को आप लोग पसंद करते हैं , उसे टीआरपी क्यों नहीं मिलती ? जिन चुनिंदा एंकर्स के बुलेटिन की आप तारीफ करते हैं , उसे अपेक्षित टीआरपी क्यों नहीं मिलती ? क्या दर्शकों का मिजाज बदला है ? क्या पब्लिक एट लार्ज वो नहीं देखती , जिसे आप पसंद करते हैं ? आपमें से बहुत लोग कह रहे हैं कि अगर कार्यक्रम बढ़िया होगा तो दर्शक जरूर देखेंगे लेकिन टीआरपी मीटर उसे अक्सर खारिज कर देता है,क्यों?


Sachin Gaur public ko kya pasand hai kya nahi isse news channels ko matlab kahan hai. 2-3 mahine pahle global warming ka rag alapne wala media ab him yug ki wapsi par stories chala raha hai. shame on the electronic media. sirf trp ki parvah hai aap logo ko. aur kisi ki nahi.aam admi ke faer psychosis ko jitna exploit aap log kar rahe hain uski had hai. har mosam main chillana gala fadna bas yahi kam reh gaya hai news channels ka.
9 hours ago

Sachin Gaur garmi jyada padi toglobal warming. thand jyada to him yug. rubbish. news 24 ki story main dava kar rahe hai ki gulf stream jam rahi hai scientist dava kar rahe hai ki ye him yug ki wapsi ke sanket hain. naam kya hain scinetists ke . aap batayenge jo ye dave kar rahe hain.
8 hours ago

Sajid Khan mujhe yeh samjh nahi aata yeh trp meter lagte kin gharoo main hai aur in meter ko lagaane ka paimana kya hai..kya yeh midlle calss gharoo mai lagte hai ya uper calss ya ganv ke kacche gharoo main.ya nayee ki dukanoo par nayee ki dujanno par...aur rahi baat aache progrme ko ya acche anchor ke progrme ko trp milne ki..ab jab hum is trp khel par yaakin hi nahi karte to jawab mujhe sujh nahi rha..kyon ki acache progrme aur acche anchor ke progme loog dekhte hai ..
8 hours ago

Ajit Anjum सचिन आपका गुस्सा बहुत हद तक जायज है लेकिन हम युग के बारे में आप जल्दी में नतीजे पर पहुंचकर गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं . पूरी दुनिया में तापमान जितना नीचे गिरा , उसे देखिए , समझिए . ये कोई मनगढंत कहानी नहीं है . पूरे यूरोप में रिकार्ड टूट गया है . दुनिया को कई कोनों में कोहराम मचा है . बाकी आपकी बात सर माथे पर . यही तो जानना चाहते हैं हम कि अगर एनडीटीवी इंडिया , जी न्यूज , स्टार न्यूज , आईबीएन , आजतक या कोई और चैनल कोई सार्थक कार्यकम बनाता है तो जनता उसे देखती क्यों नहीं है ...
8 hours ago

Sachin Gaur seedhe sadhe sapt mosam ka majak bana diya hai trp ke chakkar main. jesi sardi aaj pad rahi hai. isse kahin jyada sardi kai bar pad chuki hai. aur jesi garmi is bar padi thi usse bahut jyada garmi pahle pad chuki hai. is bar highest tapman 44.8 jabki 10 saal pahle delhi main 47 tatah 45-46 kai bar ho chuka hai. lekin tab electronic media nahi tha isliye global warming nahi thi. 1degree 2-3 degree tak delhi ka tapman bahut baar pahle bhi ja chuka. 2006 ke december last 0 degree tak gaya tha delhi ka tapman. tab to himyug wapas nahi aaya.
8 hours ago

Hasan Jawed आप ने मुद्दा सही उठाया है पर ये टीआरपी का रोना बेहद बेतुका है! कौन कहता है की हम बेहतर प्रोग्राम को बेहतर नहीं कहते! पहली बात ये की दर्शक अपनी बात कहे कैसे? जिस के आधार पर आप समझेंगे की लोगों ने हमें सराहा है! मेसेज और मेल करना आसान नहीं है और नाही लोगों के पास टाइम है आप के लिए क्यूंकि लोग समझते हैं की मनोरंजन चैनल का कंटेंट चुरा कर लोगों को दिखान...
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8 hours ago

Sachin Gaur us aur europe main aisi barfbari pahle bhi ho chuki hai. ye koi nai baat nahi. logo ko murkh banana chod dijiye. aisi news dekhkar log ghabra jate hain. unhe dariye mat normalzindagi jeene dijiye.
8 hours ago

Ajit Anjum हमयुग कोई दिल्ली के संदर्भ में नहीं है , दुनिया के संदर्भ में है . पूरी दुनिया के तापमान पर नजर डालिए . चाहे तो गूगल पर सर्च कर लीजिए .
8 hours ago

Sachin Gaur aise wahiyat aur fizul programmes ko trp isliye milti hai kyunki fear psychosis ki wajah se wo ise dekhte hain. unka dar unhe ye dekhne ko prerit karta hai. aur aapko trp mil jati hai. shame on news channls
8 hours ago

Ajit Anjum वैसे बता दूं कि हम युग या आइस एज के नाम से कार्यक्रम हर चैनल पर चले हैं आप खामखा न्यूज 24 से नाराज हो रहे हैं . हर अखबार में खबरें छप रही है . फिर भी आपकी नाराजगी की मैं कद्र करता हूं . जहां तक रही टीआरपी की बात तो मैं तो कह ही रहा हूं टीआरपी मजबूरी और अभिशाप है . अगर अच्छे कार्यक्रमों से टीआरपी मिलने लगे तो चैनलों की तस्वीर बदलने लग जाएगी .
8 hours ago

Nabeel A. Khan @Anjum ji I guess ye jo "AAP" hai yahee to public hai to jo "AAP" ko pasand wahi sabka baap-------all in one blunt but straight forward statement (Sincere apology for the harsh lingo)
8 hours ago

Om Singh अंजुम सर, लगता है बहस की दिशा भटक गई है ... मुद्दे की बात नहीं हो रही है ...
8 hours ago

Sachin Gaur ajeet ji 2 mahine pahle dunibhar main global warming ko lekar shor tha copenhegan main summit ho raha tha. how is it possible that with in 2 months an ice age can come. and its matter of happines if such a snow fall is occuring. glaciers pe barf jamegi. nadiyon ko pani milega.
8 hours ago

Sachin Gaur aap gaon main jaiye wahan log normal zindagi ja rahe hain. agar thand pad rahi hai to pad rahi. garmi pad rahi hai to pad rahi hai. koi hangama nahi hai. kyonki wahan news channels nahi hain. weather cycle has just changed. niether its global warming nor ice age. may main ab utni garmi nahi padti jitni pahle padti thi garmi ab june se start hoti ...
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8 hours ago

Nabeel A. Khan @Anjum ji@ Sachin ji It is the over all character of an individual media matters-had it been done on BBC, NDTV or written in any newspaper without any doubt it would have been accepted but as the mentioned channel had been involved in some irrelevant stories now even the good and correct stories becomes tough to believe for the viewers, However, i dont have any evidence to prove the veracity of the story or prove it to be wrong
8 hours ago

Om Singh सचिन गौर जी... आपकी पीड़ा को हमने समझ लिया ....
8 hours ago

Sachin Gaur i tell u first panipat war was fought on30 april 1526. that time it was too hot in april . we cant expect such hot april now.
8 hours ago

Sachin Gaur its a routine weather change which happens after every 5-600 years after. us main aisi barf 30 saaal pahle bhi padi thi. tab to ice age nahi aaya ab kese aa jayega.
8 hours ago

Ajit Anjum नबील,आपकी जानकारी के लिए बता दूं कल रात साढ़े नौ बजे एनडीटीवी इंडिया ने भी आधे घंटे का कार्यक्रम किया था . संजय अहरवाल शायद एंकर कर रहे थे . कल मेल टुडे समेत कई अखबारों में आइस एज के नाम से ही खबरें छपी थी . आज भी छपी है . बिना फैक्ट चैक किए जजमेंट न दें . एपीटीएन से दिन भर में फूटेज की बारिश हो रही है .
8 hours ago
http://www.blogger.com/img/blank.gif

Ajit Anjum आप सिर्फ शीर्षक पर जा रहे हैं . हेडिंग या हेडलाइन का मतलब अगर उस तरह से निकालेंगे तो हर खबर बेकार है .
8 hours ago

Nabeel A. Khan @Anjum ji didn't challenge the veracity of the news- moreover I don't say that this news is irrelevant but I think you should agree the way news is presented at times on some hindi channels which trivialises even the important aspect and for a class of viewers it forces them to create a partial perception. However, we all know that no one is ...
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8 hours ago

Nabeel A. Khan @Anjum ji But headline should ideally be the crux of story-let me share with u one incident -a report gives a headline -about two actors from Bollywood getting married(the name like A set to marry B ) which interested me to read the story - but when i read it i found that they r making film where they will play husband wife -it happened 2 years back in office-now should i consider it ideal ------no i will never
7 hours ago

Ajit Anjum दोस्त क्या आपको लगता है कि इतनी ज्ञान भरी बातों के बारे में हमें पता नहीं है ? मैंने सात साल प्रिंट में भी काम किया है दोस्त और टीवी में तो कर ही रहा हूं . ऐसा नहीं है कि जो आप कह रहे हैं वो मैं समझता नहीं हूं . ऐसा भी नहीं कि जो टीवी में हो रहा है , उसे अतिप्रसन्न हूं . होता तो अपनी बात कहने यहां नहीं आता . यही तो मैं कह रहा हूं कि जिस तरह के कंटेंट की आप लोग तारीफ करते हैं ,उसे पब्लिक एट लार्ज नहीं देखती . या फिर
7 hours ago

Hasan Jawed GUSSA AAP KO BHI AATA H
7 hours ago

Ajit Anjum अरे मैं भी तो आदमी हूं यार . ओखल में सर दे दिया तो इसका मतलब ये तो नहीं कि चिल्लाने का अधिकार भी न रहा
7 hours ago

Nabeel A. Khan I can never dare your knowledge- I salute your skill but the main issue is that an adroit person of great intellect knowledge like you and many other in the media can afford to be ruled by marketing gimmick--and compromise with our soul--Even in my office for that matter many seasoned journalists are happily ready to kill the essence of journalism to woo some market-I fear we will be soon loosing our sheen----
7 hours ago

Nabeel A. Khan In our own world we are allowing the aliens to set up the rules --------@Ajit ji I apologies if i hurt u by any means- it was just for the discussion
7 hours ago

Ranjan Rituraj मै मीडिया से नहीं हूँ . काफी दिनों से "बहस" का हिस्सा बन रहा हूँ . कुल मिला कर - यही पता चला की ...टी आर पी ..बकवास है ! टी वी न्यूज़ चैनल "रामायण" और " महाभारत" की तरह पुरे देश के सडकों को सुना नहीं कर सकता ! दर्शक कई वर्गों में बंटा है ! हर कोई सर्फ़ नहीं खरीदता है -"निरमा" और हिपोलिन भी बाज़ार में है - पुरे बाज़ार को "निरमा" और "हिपोलिन" की तर्ज़ प...
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7 hours ago

Nabeel A. Khan @Rituraj ji I agree --but nirma ho ya hipolin dono mein detergent hi hona chahiye aur uska kam bhi ek hi hona chahiye gandagi ko saaf karne -lekin aap detergent ke packet mein balu (sand) bhar kar bechenge to achhi baat to naheen hai??
7 hours ago

Sachin Gaur om singh ji aapne hamari pida ko smjha dhanyavad. aap ab chaplusi chod kar behas ka hissa baniye ya chup rahiye.
7 hours ago

Sachin Gaur ajit ji kya aap ko lagta hai ravish kumar ya kamal khan ki special reports ko log nahi dekhte hain. chini ko ravish kumar ki report lajawab thi. unki sheli presentation sab kuch a one. kese ek aam admi usko chod him yug ki wapsi ko dekh sakta hai.
7 hours ago

Sachin Gaur ruchika case ko news 24 ne bahut acche se follow kiya tha. i appreciate it. kese koi isko mana kar sakta hai.
7 hours ago

Pravakar Chanchal सर, पहले के मुकाबले अब दर्शकों का नज़रिया काफी बदला है...मेरे ख्याल से अब दर्शक न्यूज़ चैनल पर न्यूज़ देखना ज्यादा पसंद करता है...और ये ज़रूरी है नहीं कि दर्शक एंकर का चेहरा देखकर ही आपका चैनल देखे...और ये भी सच है कि दर्शक जिन कार्यक्रम को ज्यादा पसंद करते हैं उसे टीआरपी नहीं मिलती ठीक वैसे ही जैसे कि कोई फिल्म जो दिल तो छू जाती है मगर वो हिट नहीं होती....
6 hours ago

Rahul Goel हम मीडिया से जुड़े लोग जब किसी कार्यक्रम को देखते हैं तो अलग नजरिये से ..अब कुछ हजार मीडिया वालों से टीआरपी आने से तो रही ...मेरे दोस्त जो पत्रकार नहीं है ..कॉल सेंटर में काम करते हैं ..या एम बी ए कर रहे हैं..या किसी दूसरे पेशे से जुड़े है..उन्हे बुंदेलखंड या सौराष्ट्र में भुख मरी और किसानों की मौत से जुड़ी खबर देखने में कोई मजा नही आता शायद उन्हे ...
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6 hours ago

Ajit Anjum चलिए अब फिर मुद्दे पर आते हैं सचिन जी , मैं पहले तो शुक्रिया अदा कर दूं कि आपने रूचिका पर न्यूज 24...
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6 hours ago

Rahul Goel मैं रंजन की बात से कुछ हद तक सहमत हूं
6 hours ago

Diwan Singh Kathayat सर, माफ कीजिएगा पर मैं अक्सर देखता हूं की आप प्रोग्राम, एंकर्स और टीआरपी के बीच उलझे रहते हैं...एक चैनल का हैड होने के नाते वाजिब भी है...सर थोड़ी देर के लिए एक दर्शक की नजर से देखिए...आज हमारी गिनती से ज्यादा चैनल हमारे पास हैं...और ये हमारा भर्म है कि हमारे एंकर्स कोई स्टार हैं...चैनल के बाहर कोई किसी को नहीं जानता...जो रोज उसे देखने बैठे...
6 hours ago

Diwan Singh Kathayat और सर दूसरी बात प्रोग्राम के कंटेंट में दम हो या ना हो प्रोमो जोरदार होना चाहिए...कहा भी गया है पैकिंग अच्छी होनी चाहिए...अंदर कुछ भी बेचो...लाइक इंडिया टीवी
6 hours ago

Nabeel A. Khan I guess Ruchika case got worst on Times Now--------i ll support it tomorrow gud night
6 hours ago

Richa Sakalley अजीत सर, सच तो यही है कि ज्यादातर दर्शक अच्छे कार्यक्रम ही देखना चाहते हैं, आप जिन चुनिंदा एंकर्स की बात कर रहे हैं उनके सभी कार्यक्रम लगभग सभी वर्ग के दर्शकों में सराहे जाते हैं...(टीन एजर्स, बच्चों को छोड़कर)
इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'समय' चैनल 'था'...जब सहारा समय का नेशनल चैनल 'समय' के रुप में दर्शकों के सामने आया तो हर जगह चर्चा में रहा...'समय' में उस दौरान हर वो फैसला हिम्मत के साथ लिया गया जिसे लेने में आज तमाम बड़े चैनल सौ बार सोचेंगे...मसलन, ज्योतिष कार्यक्रम नहीं चलाए गए...टीवी सीरियल, नाच गाना, कॉमेडी नहीं दिखाई गई। चैनल गंभीरता के ताने-बाने में बुना गया...6 महीने के भीतर चैनल के चर्चे हर ज़ुबान पर थे और टीआरपी भी मिल रही थी...खैर...मुझे लगता है सर बात थोड़े से धैर्य और थोड़े से विल पॉवर को दिखाने की है...सर टीआरपी से अभिशप्त होने या मजबूर होने का गाना गाने से अच्छा है क्यों न तमाम चैनल मिलकर कुछ क्रांति करें...टीआरपी को मजबूर करें....बाज़ार को मज़बूर करें...हिम्मत के साथ ये सच कहकर कि "भैया ये है हमारे पास बेचने को...जनता हमारे साथ है....हम यही बेचेंगे"....मुझे लगता है शायद हम जीत जाएं...टीआरपी का खेल रुक जाए...हालांकि मैं इन सब मामलों को और बड़े स्तर की मजबूरियों को उतना अच्छे से समझती नहीं हूं हो सकता है हाइपोथिटिकल बात कह रही हूं...लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों लगता है कि ऐसा कर सकते हैं...
5 hours ago

Dinesh Mansera ajit ji, aapko yaad hoga ki manoher kahaniya, satya katha jaisi patrikaye bhi apne zamane me dharmyug,sapatahik hindustan se jayaada bikti thi wahi daur aaj bhi hai , jise aap TRP se jod kar dekhte ha , TRP unhe karykarmo ki jyaada ho jati joki india tv , sansani,jaise hote hai, jabki news point ya doosre progrme neeche khisak jate hai..humare yahan achche karykram dekhne wale deir raat tak partiyo me hote ha.
बहस आगे भी जारी है...

2 comments:

  1. TRP ka graph badhane ki hod mein hi channels aise reality show dikhate hai,jo sach se koso door hote hai aur jinmein foohadpana kut kut kar bhara hota tha ..aur ye badi vidambna hai !

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