Monday, 22 June 2009

टेलीविजन पर आनेवाली है मैट्रीमोन्यल कार्यक्रमों की बाढ़


पीटीसी देते हुए स्टार न्यूज के संवाददाता ब्रजेश राजपूत ने कहा कि- कहते हैं जोड़ियां उपर से बनकर आती हैं लेकिन अब टेलीविजन शादी का सेहरा बांधने का काम कर रहा हैब्रजेश राजपूत की बात करें तो साफ संकेत है कि टेलीविजन अब वो भी काम करने लग गया है जो कि अब तक उपरवाले के हाथ में था। रब ने बना दी जोड़ी की समझ रखनेवालों को बेहतर ढंग से पता है कि जब तक उपरवाले की मर्जी न हो जाए किसी की किसी से बंधन की गांठ नहीं लग सकती। अब आप चाहे किसी लड़की के साथ या फिर लड़के साथ सालों से टिम लकलक ते टिम लकलक करते रह जाइए,कुछ भी हाथ लगनेवाला नहीं। लेकिन स्टार प्लस जिस तरह से अपने कार्यक्रम वीवेल विवाह के जरिए खुदा की मर्जी औऱ उपरवाले की कृपा जैसी मान्यताओं को ध्वस्त करने में जुटा है उससे साफ अंदाजा लग जा रहा है कि आनेवाले समय में देश की एक बड़ी आबादी की सोच को बनाने और बदलने की तरह शादी को लेकर भी टेलीविजन अपनी दखल कायम करने जा रहा है। अगर आप 29 जून से एनडीटीवी इमैजिन पर शुरु होनेवाले कार्यक्रम राखी का स्वयंवर के प्रोमो पर गौर करें तो ये समझ बनाने की कोशिशें जारी है। राखी का कहना है- अब तक जिंदगी में हमें जो कुछ भी मिला,वो टेलीविजन ने दिया तो फिर जीवनसाथी क्यों नहीं।

मनोरंजन चैनलों के कार्यक्रमों और फार्मेट पर गौर करें तो अब तक तीन या चार से ज्यादा कैटेगरी बनाने की स्थिति में हम नहीं है। रियलिटी शो,सोप ओपेरा यानी सीरियल्स और लाफ्टर शो या ऐसे ही इन्टरटेनिंग शो। लेकिन आनेवाले समय में जल्द ही मैट्रीमोन्यल शो भी इसमें अलग से शामिल हो जाएगा। टेलीविजन के जरिए शादी की पहल फिलहाल स्टार प्लस ने शुरु की है और 29 जून से इमैजिन राखी का स्वयंवर रचाने जा रहा है, एक हद तक आप इसे भी मैट्रीमोन्यल के खाते में रख सकते हैं लेकिन ये एकतरफा मामला है। वर के तौर पर 16 प्रतिभागी तो इसमें आपको दिख जाएंगे लेकिन वधू को लेकर शार्टेज पड़ जाएगा। इन दोनों की पॉपुलिरिटी आनेवाले समय में टेलीविजन की पॉपुलरिटी तय करने जा रही है। उन लोगों के बीच टेलीविजन एक बार फिर से पॉपुलर होने जा रहा है जो अब तक इसे बकवास और डिब्बा मानकर छोड़ चुक हैं जिसमें यूथ जेनरेशन विशेष तौर पर शामिल है। जब बात एक अविवाहित लड़का या लड़की और उसे लेकर परेशान होनेवाले घऱ के सदस्यों की होती है तो उन तरीकों को सीरियसली लेने में कोई परेशानी नहीं होती जिससे लगता है कि मन-मुताबिक वर या वधू मिल जाएंगे। आनेवाले समय में टेलीविजन यही भरोसा पैदा करने की कोशिश करेगा। संभव है कि दो-चार महीने के अंदर ही सारे चैनलों के अपने-अपने मैट्रीरमोन्यल शो शुरु हो जाएंगे।

मेट्रीमोन्यल शो की सफलता की गारंटी लगभग पहले से तय है। इसकी बड़ी वजह है कि देश में तेजी से एक ऐसा समाज पनप रहा है जिसके लिए शादी एक ऐसा सिरदर्द है जो ले-देकर वो मैट्रीमोन्यल एजेंसियों के भरोसे दूर करना चाहते हैं। पंडितजी औऱ मौलवियों के भरोसे सुयोग्य वर और वधू खोजे जानेवाले इस देश में कभी किसी ने शायद ही ऐसा सोचा होगा कि शादी से जुड़ी एजेंसियों की इतनी मांग बढ़ जाएगी और रिश्ते तय करने में वो इस तरह की भूमिका तय करने लग जाएंगे। टेलीविजन का ये मैट्रीरमोन्यल शो इसलिए भी मार नहीं खाएगा कि इसकी टेस्टिंग एक तरह से पहले ही हो चुकी है। शादी डॉट कॉम और जीवनसाथी डॉट कॉम की लोकप्रियता ने उन्हें एक तरह से फीडबैक दिया है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार संभावना है। इतना ही नहीं टेलीविजन के ये शो इन एजेंसियों से कुछ ज्यादा ही सुविधा देने लगे हैं जिसकी समझ ऑडिएंस औऱ इसमें शामिल होनेवाले लोगों को भी होने लगी है।

स्टार प्लस के वीवेल विवाह की पहली जोड़ी जो कि अब शादी कर चुके हैं नीरज औऱ स्वेच्छा उनकी बातों पर गौर करें तो आपको अंदाजा लग जाएगा कि टेलीविजन औऱ चैनल्स कैसे अपने को विशिष्ट बनाने की कोशिश में लगे हैं। नीरज पराशर का कहना है- देश में कितने ऐसे परिवार और लड़कियां हैं जो कि उसकी जहां शादी हो रही है वहां जाकर देख सके कि उसके होनेवाले ससुराल में कितने कमरे हैं। ये शो ये संभव कराता है। टेलीविजन के जरिए खोजी गयी पहली बहू स्वेच्छा का मानना है कि इस शो का कॉन्सेप्ट बहुत ही प्रैक्टिकल है,कॉन्सेप्ट इज वेरी गुड। वैसे भी अगर आप शादी डॉट कॉम या जीवनसाथी डॉट कॉम को एक्सेस करते हैं तो आपको लड़की या लड़के की दो या तीन स्टिल फोटो ही देखने को मिलती है। संभव है इस फोटो से आपको बहुत सारी बातें समझ नहीं आती। बायोडाटा से मोटे तौर पर एक अंदाज मिल जाता है। लेकिन जो लोग आवाज,बॉडी लैंग्वेज,एटीट्यूड जैसी बातों पर विशेष ध्यान देते हैं उनके लिए ये शो बहुत मायने रखते हैं। इसके जरिए आप अपने होनेवाले जीवनसाथी को एक लाइवली पोजिशन में देख पाते हैं।

शादी को लेकर एक दूसरी बड़ी समस्या है कि लोगों के पास इसके लिए बहुत अधिक समय नहीं है। वो चाहते है कि कोई एक लंबी 15 से 20 दिनों की छुट्टी लें और लड़की या लड़का देखने से लेकर विदाई करने औऱ बहू हो तो घर लाने तक की रश्म पूरी हो जाए। बिहार में इसे चट मंगनी पट बिआह कहते हैं। अदिति जो कि इस शो को होस्ट कर रही है ने बाइट देते हुए कहा कि- मुझे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि नीरज और स्वेच्छा की शादी मात्र 20 दिनों के भीतर ही हो जाएगी। चैनल अब यही से अपनी ब्रांडिंग करनी शुरु करेगा औऱ ऑडिएंस को भरोसे में लेने की कोशिश की आप यहां आकर फंसेंगे नहीं बल्कि एक ही लंबी छुट्टी में अपने मन-मुताबिक वर या वधू पा लेंगे। दिनभर मेटरीमोनियल से जुड़े मेल का जबाब देते और मेल चेक करते रहनेवाले कुंवारे लड़के और लड़कियों के बीच टेलीविजन एक नयी उम्मीद के साथ आया है। अब तक टेलीविजन सीरियलों में किसी लड़की या चरित्र को देखकर घर की महिलाएं कहा करती रहीं है कि हम अपने घर में तुलसी या पार्वती जैसी ही बहू लाएंगे,उऩके बीच एक उत्साह बन रहा है कि अपनी बहू टेलीविजन की बहू होगी,देखा-जांचा और परखा हुआ। और इधर जब वर के तौर पर लड़का टेलीविजन पर आ चुका है तो आउटडेटेड तो होगा ही नहीं।

विवाह का समय है दोपहर दो बजे। रुटीन के तौर पर देखें तो आमतौर पर अल्सा जानेवाला समय,झपकी और नींद के बीच डूबते-उतरते रहने का समय। लेकिन चैनल ने इसे चुना है जो कि ऑडिएंस को सबसे ज्यादा एलर्ट कर देता है। एक बात ये भी है कि मेटरीमोनियल साइटों ने पहले से ही एक लॉट ऐसी तैयार किया है जो संभव है कि टेलीविजन के इस कार्यक्रम की तरफ शिफ्ट होते चले जाएं। बाकी कार्यक्रमों के मुकाबले चैनल को इस कार्यक्रम के लिए कम बिजनेस रिस्क उठाने पडेंगे। आनेवाले समय में समाज के बीच एक नया मुहावरा बनेगा। देश के कई हिस्सों में बहुओं के नाम नहीं लिए जाते। परमेसर की घरवाली या बॉबी की मम्मी कहा जाता है। कहीं-कहीं जहां उसका मायका होता है,वहां का नाम लिया जाता है- कानपुरवाली। अब ये भी होगा- जी टीवी वाली बहुरिया,स्टार प्लस वाली भाभी। जो जिस चैनल के जरिए शादी रचा कर आयी है, उस हिसाब से उसकी पहचान बनेगी।
इन सबके बीच बच्चे ऑडिएंस की दिलचस्पी भी इस शो के प्रति बढ़ेगी। शादी के मामले में घर के बच्चे टपर-टपर नहीं बोलते, ये धारणा टूटेगी क्योंकि जिस माध्यम से बहू और दामाद चुने जाने हैं उसकी बेहतर समझ उन बच्चों के ज्यादा है। इसलिए ये मुहावरा भी पॉपुलर होगा- देखना, आच्छथा,मेली चाची जलुल बनेगी।...

6 comments:

  1. इस नए ट्रैंड का नतीज़ा देर से मालूम चलेगा जब कि ऐसे कार्यक्रमों के ज़रिए शादी करनेवाले लड़के-लड़की एक ऐसे शो की मांग करेंगे जो टीवी पर तलाक़ दिलवाता हो...

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  2. सफलता के प्रति गारंटी को देखते हुए ही निजी चैनल इस ओर आकर्षित हो रहे हैं .. पर यदि इससे समाज का भला होता है .. तो इसमें कोई बुराई भी नहीं।

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  3. राखी का स्वयंवर का प्रोमो देख कर दो प्रश्न
    दिमाग मे आते हैं
    १ स्वयंवर इत्यादि प्रथाओ को बंद करवाने
    के लिये बशुत से लोगो ने अथक परिश्रम किया था
    अब फिर उन्ही सब चीजों की वापसी ?? क्या संकेत दे रहे हैं
    २ और अगर राखी एक आधुनिका की तरह
    अपनी पसंद से वर की तलाश करना चाहती हैं
    तो ये साडी और भारतीये परिधान क्यूँ

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  4. प्रोमो शादी कम नौटंकी ज्यादा लगते है..

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  5. सही कहा-भेड़ चाल है और प्रायोजित तो खैर है ही.

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