Monday, 12 April 2010

जी मिचलाता है सानिया का, अब अचार की हुई दीवानी



..जो सानिया तीन महीने पहले तक शोएब की दीवानी थी,अब वो अचार की दीवानी हो गयी है। देशभर के लोग उन्हें अचार का डब्बा भेज रहे हैं। इस मामले में 25 साल का छुट्टन भावुक हो जाता है और कहता-आज मेरी अम्मा जिंदा होती तो मैं भी सानिया के लिए कटहल का अचार बनवाकर भिजवाता। मेरी मां कटहल का अचार जितना बेहतर बनाती है,सवाल ही नहीं है कि सानिया को पसंद न आए।..उसी क्रम में देशभर में अचार की बेहतर कंपनियों,दुकानों,किस्मों और तरीकों की शिनाख्त होगी। राजस्थान या मेरठ का कोई बंदा तभी अकड़कर इंडिया टीवी पर बाइट दे रहा होगा कि उसी के यहां से अचार गयी है जिसे कि सानिया ने चटकारे लेकर मीडिया के सामने टेस्ट किया।..कहानियों का अंत नहीं है,एक के बाद एक कहानी बनेगी।..लेकिन न्यूज चैनल के लिए सानिया मिर्जा हमेशा खबर रहेगी।

फेसबुक पर गिरीन्द्र ने मीडिया के लोगों खासकर न्यूज चैनलों से गुहार लगायी है कि अब वो सानिया मिर्जा को बख्श दें। अब निकाह तो हो गया,खुदा के वास्ते अब इनकी बातें करना छोड़ दें। गिरीन्द्र चैनलों को एक बार फिर उन मुद्दों की तरफ लौटने की अपील करते हैं जिसमें कि लोगों के कन्सर्न हैं। मुझे नहीं पता कि फेसबुक पर लिखी गिरीन्द्र की अपील न्यूज चैनलों से जुड़े कितने लोगों तक पहुंचेगी और अगर पहुंचेगी भी तो उसका असर उन पर होगा भी या नहीं? और अगर होगा भी तो वो इस स्थिति में होगें भी कि नहीं कि इसे मान लें। क्या न्यूज चैनल के लोगों का कलेजा इतना बड़ा है कि वो टीआरपी का लोभ छोड़कर एक आम ऑडिएंस की बात मान लें? मुझे तो रत्तीभर भी ऐसा नहीं लगता। बहरहाल मैं गिरीन्द्र को इस तरह की गुहार लगाते रहने की सलाह देने के वाबजूद घोषणा करता हूं कि सानिया मिर्जा की कहानी इतनी जल्दी टेलीविजन के पर्दे से नहीं उतरने वाली। मैंने कमेंट भी किया- अभी कहां गिरि,अभी तो मेंहदी और 15 तारीख की रिसेप्शन बाकी है। कुछ दिन तक मामला ठंडा पड़ भी जाए तो फिर ये खबर तो अभी से ही गदराने लगी है कि जी मचलता है सानिया का, अचार की आशिक हुई सानिया। कमेंट लिखने के बाद मैं तभी सोचने लगा कि आज से चार महीने बाद न्यूज चैनल सानिया मिर्जा को लेकर कौन सी स्टोरी बनाएंगे?

न्यूज चैनलों के लिए सानिया मिर्जा के संबंध और सगाई को लेकर दुनियाभर की अटकलों और फजीहतों का एक राउंड हो चुका है। शोएब के साथ शादी के बाद अब तक की जो स्थिति बनी है उस आधार पर इन चैनलों के भीतर इतनी समझदारी आ चुकी है कि वो ये मानने को तैयार हो जाएं कि दोनों के बीच के संबंध स्टेबल होंगे। अब किसी तरह का लोचा नहीं होगा और ये सो कॉल्ड एक आइडियल फैमिली का रुप लेगा। ऐसे में चैनल अब इस संबंध को और मजबूती देने में अपनी तरफ से दम-खम लगाएंगे।

दसवीं तक जिस किसी ने भी फिजीक्स की पढ़ाई की है उन्हें पता है कि उर्जा का कभी विनाश नहीं होता। टेलीविजन इसी फार्मूले पर काम करता है और इस क्रम में उसके लिए कुछ इमेज ऐसे हैं जो कि कभी नहीं मरेगें,कभी भी साइडलाइन में नहीं जाएंगे। वो इसी फीजिक्स के फार्मूले पर काम करते हैं। उनका स्टेटस भले ही बदल जाए लेकिन उनकी टीआरपी वैल्यू बनी रहेगी। वो टेलीविजन के कमाउ चरित्र है। कभी वो बाल बढ़ाकर चर्चा में रहेंगे तो कभी बाल झड़ने पर इलाज कराकर रहेंगे। कभी स्कर्ट पहनकर मेन न्यूज को खा जाएगी तो कभी लंहगे और लाल जोड़े में देशभर की खबरों को ढंक लेगी। सानिया मिर्जा की कैटगरी ऐसी ही है। ऐसे चरित्र अपने काम से आगे जाकर भी चर्चा में बने रहने की वजहों के साथ जुड़ जाते हैं। यकीन न हो तो मोटे तौर पर आप अंदाजा लगा ले कि सानिया मिर्जा जितना अपने खेल को लेकर चर्चा में नहीं रही उससे कहीं ज्यादा स्टेटमेंट,ड्रेसिंग सेंस,नथनी और अब तो माशाअल्लाह। ऐसे चरित्र जब एक बार चैनल को इस बात का एहसास करा जाते हैं कि उसकी हर बात बिकेगी,उसकी हर हरकत को देखा जाएगा। ऐसे में टेलीविजन का रवैया कैसा होगा,थोड़ा इसे प्रिडिक्ट कर लेना जरुरी होगा।

सानिया और शोएब के बीच के संबंधों को स्टेबल करने के लिए चैनल लफंदरगीरी छोड़कर थोड़ा सुधर जाएंगे। वो अब 'हमारे चैनल में इस तरह का चूतियापा नहीं होता है'के अंदाज में काम करेंगे। वो साफ कर देंगे कि सानिया शोएब के साथ उसी तरह खुश है जैसे एक सम्पन्न भारतीय परिवार में ब्याहने पर कोई लड़की खुश रहती है। शोएब सानिया की गोद में दुनियाभर की खुशियां लाकर उझल दे रहा है। जी हां,सही सुना आपने,दुनियाभर की खुशियां जिसमें उसकी मां बनने की भी चाहत शामिल है। सानिया जल्द ही खुशखबरी देगी। जल्द ही उसके आंगन में किलकारियां गूंजा करेगी। आदर्श पत्नी के तौर पर तो सानिया ने सोएब के साथ छ महीने गुजार दिए। अब वो हमारे सामने एक आदर्श मां के रुप में पेश आए इसके लिए सानिया को ढेर सारी शुभकामनाएं। जिस चैनल की जैसी औकात होगी,वैसी वो बाइट जुटाकर ला सकेंगे। कुछ पहुंचे निकले तो उस लेडी डॉक्टर तक जा सकते हैं जो सानिया को कन्सल्टेंसी दे रही होगी। सानिया होनेवाले बच्चे का क्या नाम रखेगी,उसकी शक्ल शोएब पर जाएगी या फिर एक सानिया जो पाकिस्तान की पैदाइश है इस पर स्पेशल स्टोरी बनेगी। ये क्रम चलता रहेगा। भावनाओं में जीनेवाली इंडियन ऑडिएंस इसे आंखे चीर-चीरकर तब भी देखेगी। जिस गजोधर,छुट्टन, पिंटुआ,बबलुआ,माधो ने सानिया के बियाह के दिन मातम में अनाज का एक दाना मुंह में नहीं लिया वो भी मन ही मन सानिया के बच्चे के लिए नाम सोचकर रखेगा। चैनल थोड़ा दिमाग लगाए तो एक शो करा सकता है- सानिया के बच्चे का कीजिए नामाकरण और सानिया की फैमिली के साथ सिंगापुर में बिताइए पूरे एक सप्ताह टाइप का इनाम घोषित कर सकता है।
इधर विज्ञापन की दुनिया भी सानिया की इस स्टेबल गृहस्थी से अपने को जोड़कर देखना शुरु कर देगी। पहले जो सानिया एडीडॉस बेचा करती थी,अब वो काजोल की ही तरह होम एप्लीएंन्सेज बेचा करेगी। सानिया फ्रीज से आम शर्बत निकालेगी तो शोएब उसी कंपनी के प्रेस बॉक्स से कपड़े प्रेस कर रहा होगा,पीछे से उसका बच्चा दाग लगे कपड़े को उसी कंपनी की वॉशिंग मशीन से झक-झक धोकर ले आएगा। इस तरह से विज्ञापनप्राप्त एक आदर्श न्यूक्लियर फैमिली बनेगी। वो भी काजोल की तरह टम्मी-मम्मी बोलकर सूप,सॉस,हेल्थ ड्रिंक बेचा करेगी जिसमें मां का प्यार बार-बार छलकरकर हम जिद्दी दर्शकों के बीच छलककर आएगा। कल तक जिस सानिया में अपनी गर्लफ्रैंड की छवि खोज रहे थे,अब पत्नी की खोजनी शुरु कर देंगे। मां की आंखों से आदर्श बहू के तौर पर तुलसी रिप्लेस हो जाएगी। अब सानिया जिस बच्चे को पोलियो ड्रॉप पिला रही होगी वो उसके अपने बच्चे होगे। लाइन इस तरह की होगी- मैं अपने बच्चे को सुरक्षित करती हूं,क्या आप नहीं? सानिया परिवार नियोजन करा रही होगी। विज्ञापन की लाइन होगी- जब मैं एक लड़की हूं तो एक से अधिक लड़की क्यों? शोएब को सरोगेट काम मिला करेगा। ये सबकुछ होगा। सानिया के बच्चे पाकिस्तान के स्कूल में पढेंगे और हिन्दुस्तान के मैंदान में फुटबॉल खेलेंगे,अमन की आशा का विज्ञापन करेंगे। सानिया के बाल पकने शुरु होंगे- वो लॉरिएल के कलर बेचा करेगी। सानिया थोड़ी कमजोर भी दिखेगी लेकिन इन्श्योरेंस पॉलिसी के विज्ञापन करेगी। लेकिन सानिया,सानिया न्यूज चैनल और टेलीविजन के लिए हमेशा खबर रहेगी,हमेशा एटेन्शन एलीमेंट रहेगी।

नोट- सानिया की शादी पर एक टेलीविजन शुभचिंतक की ओर से इसे बेहतर कामना और क्या हो सकती है? एक प्रति प्रिंटआउट रख लें तो हमारे चैनल के साथी स्क्रिप्ट लिखने से भी बच जाएंगे,कॉपीराइट तो है नहीं।

2 comments:

  1. बहुत दूर की सोच है चैनल वालों को ये लेख पढ़ना चािहए आैर अगर उनके पास आईिडया की कमी है है तो यहां से िचरकूटगिरी रिपोर्टिंग के ढ़ेरों क्लू िमल सकते हैं।

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  2. http://www.janmatpatrika.com/index.php?option=com_hwdvideoshare&Itemid=107

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